Sunday, 7 February 2016

स्वास्थ्य चर्चा कार्डियोलोजी यूनिट हेड एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शर्मा का कहना है -

सजगता से बचा जा सकता है हार्ट अटैक से
हाथ, कोहनी, कंधे, जबड़े, पेट में दर्द आने पर कार्डियोलेाजिस्ट को अवश्य दिखाना चाहिये क्योंकि हार्ट अटैक आने के लिए जरूरी नहीं कि दर्द सिर्फ सीने में ही आयें। यदि समय पर सचेत हुए तो ही हम हार्ट अटैक से बच सकते हैं।
वर्तमान में ह्दय रोगी बहुत बढ़ गये हैं, ऎसे में चिकित्सकों द्वारा अब यह प्रयास किये जा रहे हैं कि जहां तक हो सके, रोगी की बाईपास सर्जरी को टाला जाए। एंजियोप्लास्टी के उपकरण पूर्व की तुलना में बहुत सस्ते हो गये हैं और लाईफ सेविंग बहुत होने लगी है।

यदि आज हम स्मोकिंग शुरू करते हैं तो उसे बंद करने के बाद उसका दुष्प्रभाव शरीर में पांच वर्ष बाद हार्ट को डेमेज करने की शुरूआत के रूप में दिखाई देगा। अन्य बीमारियों की भांति हम मधुमेह व उच्च रक्तचाप को खाली नहीं छोड़ सकते। हृदय को बचाने के लिए उन पर बराबर नज़र रखनी जरूरी है।
ब्लड प्रेशर सामान्य रहना चाहिये। जिसे एक बार ब्लड प्रेशर हो गया है, उसे नियमित जांच कराते रहना चाहिये क्योंकि उच्च रक्तचाप होने का सर्वाधिक असर गुर्दे पर पड़ता है। घर में आजकल डिजिटल ब्लड प्रेशर मापने की मशीनों का उपयोग होने लगा है। ऎसे में घर में मापा जाने वाल ब्लड प्रेशर 135-85 होना चाहिये।
हृदय की जांच के लिए तीन महत्वपूर्ण टेस्ट एन्डोथीनीयल डिसफंक्शन, कारोटिड आईएमटी एवं ईबीएसटी कराकर हृदय की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है क्योंकि बीमारी अलग है और उसका ईलाज अलग है। हृदय की आर्टरी में  10 प्रतिशत ब्लोकेज से भी हार्ट अटैक आ सकता है। ह्दय रोग में एस्पि्रन एक कारगर दवा है और एक बार अटैक आने के बाद एस्पि्रन को बंद नहीं किया जाना चाहिये क्योंकि ऎसा करने से हार्ट अटैक दुबारा होने की संभावना बढ़ जाती है। हार्ट अटैक व ब्लोकेज में कोर्इं समानता नहीं है। दिल की गति अनियंत्रित होने पर रोगी की मृत्यु तक हो जाती है।