Thursday, 1 January 2015

दिल से कहें हैप्पी न्यू ईयर

आज का आलेख ( 01 जनवरी 2015 के लिए)
दिल से कहें
हैप्पी न्यू ईयर
- डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com

पूरी दुनिया में आज यही शब्द गूँज रहे हैं - हैप्पी न्यू ईयर।
विश्व का कोई सा कोना ऎसा नहीं है जहाँ हैप्पी न्यू ईयर या नव वर्ष की धूम न हो। 
यों तो यह धूम आधी रात से ही है जब तारीख के साथ वर्ष बदल गया है और हम सभी सन् 2015 में प्रवेश कर चुके हैं। 
नए सन में प्रवेश करने वाले धरती के समस्त प्राणी हार्दिक बधाई और शुभकामनाओं के पात्र हैं जिन्हें अपनी आयु के साथ नए साल में प्रवेश का मौका मिला है।
अन्यथा हमारे देखते ही देखते खूब सारे लोग हमारे साथ नए वर्ष में प्रवेश करने से पूर्व ही वहाँ लौट गए जहाँ से आए थे।
हम सभी लोक अत्यन्त सौभाग्यशाली हैं जिन्हें यह मौका मिला है।  
बहुत से लोग आधी रात को न्यू ईयर मना कर सो गए, बहुत सारे लोग दिन उगने के बाद हैप्पी न्यू ईयर में रमे हुए हैं।
भारतीय परंपरा में नव वर्ष की परंपरागत शुरूआत नवप्रभात में होने के कारण पहली जनवरी का दिन लगभग पूरी तरह नव वर्ष की बधाई, शुभकामनाओं में ही गुजरता है।
आज भी वही सब कुछ हो रहा है। चाय-काफी की चुस्कियों, अखबारों, टीवी स्क्रीन से लेकर मोबाइल स्क्रीन और घर-परिवार से लेकर आस-पड़ोस तक सभी जगह हैप्पी न्यू ईयर की धमाल है। सभी जगह लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं ही बाँट रहे हैं, बधाइयाँ दे रहे हैं।
शुभकामनाओं के मनोविज्ञान को समझने की कोशिश करें तो यह बात साफ तौर पर सामने आती है कि दुआएँ कभी खाली नहीं जाती। जो शुभकामनाएं सच्चे मन से अभिव्यक्त की जाती हैं, प्रेम और सद्भाव के संपुट के साथ दी जाती हैं वे फलीभूत होती ही हैं। पर आजकल शुभकामनाओं में जबर्दस्त मिलावट भरी पड़ी है। हमारी मंगलकामनाएँ खोखली और सारहीन हो गई हैं।
इंसान अब औदार्य और सामुदायिक प्रगति, सामूहिक विकास की भावनाओं को काफी पीछे छोड़ चला है और ऎसे में वह दाता के रूप में अत्यन्त कंजूस हो चला है। जो कुछ दे रहा है उसमें ताकत नहीं है, सिर्फ औपचारिकता का निर्वाह भर है और यही कारण है कि शुभकामनाएं सिर्फ दिखावे और उच्चारण मात्र तक सीमित रह गई हैं, अपना कोई प्रभाव किसी पर नहीं छोड़ पा रही।
आजकल आशीर्वाद और शुभकामनाएं केवल जिह्वा का विषय होकर रह गई हैं। मस्तिष्क से शब्द उपजते हैं और सीधे हाेंंठों से बाहर उत्सर्जित हो जाते हैं। हृदय को पता नहीं लगता कि दिमाग से क्या कुछ हो रहा है। 
चारों तरफ भावनाशून्य और ऊर्जाहीन शुभकामनाओं का दिखावा या ढोंग ही हम सभी कर रहे हैं। दिखावों और आडम्बरों के मामले में हम विश्वगुरु हैं।
साल भर तक जिनका मुँह देखना नहीं चाहते, जिनसे हमारी कभी नहीं बनी, न बन सकती है, जिनके हमारे रिश्तों में कडवाहट रही होती है, जो लोग नकारात्मक चिन्तन और कुकर्मों से भरे पड़े हैं, मानवीय संवेदनाओं को भुला कर हर किसी के शोषण को धर्म मान बैठे हैं, उन सभी लोगों को भी हम हैप्पी न्यू ईयर कह डालते हैं।
इस हैप्पी न्यू ईयर का कोई अर्थ नहीं होता। शुभकामनाएं दें तो दिल से दें, और ऎसी दें कि वर्ष भर के भीतर इसका कोई सुखद और सुकून भरा कोई न कोई सार्थक परिणाम जरूर सामने आए।  अव्वल बात यही है कि हमारा जागरण होना चाहिए चाहे किसी भी तरह से हो, नव वर्ष भी इसी हेतु को लेकर आता है।

सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। 

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