Thursday, 15 January 2015

करें अभिवादन उत्तरायण के सूरज का

आज का आलेख ( 15 जनवरी 2015 के लिए)
करें अभिवादन
उत्तरायण के सूरज का
- डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com
आज का सूर्योदय उत्तरायण से हुआ है और इसी के साथ ही शुरू हो गए हैं वे दिन जिनमें उत्सवी मंगल का शंखनाद होता है, उल्लास की सरिताएं बहती हैं और तन-मन नई ताजगी के साथ गति पाने लगता है।
उत्तरायण के साथ ही शुरू हो जाता है बहुआयामी जागरण। चेतन और अवचेतन, पिण्ड से लेकर ब्रह्माण्ड तक का जागरण होने लगता है। शीत निष्कि्रयता ओढ़ कर जड़ता थामे बैठे लोगाें को हिलाने और कर्म की ओर उन्मुख करने का संदेश देने आया है यह उत्तरायण।
जो लोग कुछ करना चाहते हैं, जिन्दगी को सुनहरा बनाने के लिए हमेशा उत्साह के साथ परिश्रम करना चाहते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं उनके लिए हर उत्तर देने वाला है यह उत्तरायण।
जो कुछ नहीं करना चाहते, यों ही सुस्त और दरिद्री पड़े रहना चाहते हैं उनके लिए चाहे कितने उत्तरायण आए-जाएं, वे यों ही रहने वाले हैं, उनके बारे में किसी भी प्रकार की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। कुछ साल यहाँ बने रहेंगे, फिर तो आखिर ऊपर लौटना ही है।
इन लोगों के बारे में चर्चा या विचार करना भी निरर्थक ही है क्योंकि हर फसल के साथ नाकारा भूसा, घास-फूस, खरपतवार, बेशर्मी और गाजर घास होती ही है। फिर मनुष्यों की विस्फोटक संख्या में पसरती जा रही फसल भी अछूती क्यों रहे।
जो सोये हुए हैं उन्हें सोने दें, वे खाने-पीने और सोने के लिए ही पैदा हुए हैं। बात उन लोगों की करेें जो जगना चाहते हैं, जगे हुए हैं लेकिन तीव्रता चाहते हैं, आगे बढ़ना और कुछ पाना चाहते हैं। 
जो कुछ करना चाहते हैं उनके लिए ही यह उत्तरायण आया है। इतने बरसों तक हमने उत्तरायण का मर्म न जाना, कोई बात नहीं, जब जगे तब सवेरा, अबकि बार जग जाएं और ऎसे जगें कि दुबारा कोई हमें सुला न सके। 
यह जागरण सिर्फ शरीर का नहीं बल्कि मन, आत्मा और मस्तिष्क से लेकर सब प्रकार का जागरण होना चाहिए तभी रोशनी के कतरे मस्तिष्क की दीवारों से लेकर हृदय के कोने-कोने तक को आलोकित कर नई जिन्दगी और सुकून दे पाएंगे।
उत्तरायण हमेशा मांगलिक उत्सवों का आगाज करता है। यह उत्सव पिण्ड से लेकर परिवेश तक से जुड़े हुए हो सकते हैं। हर अवसर कोई नया उत्सवी पैगाम लेकर ही आता है।
उत्तरायण पूरे छह माह का प्रतिनिधित्व करने वाला महोत्सव है। छह माह किसी की भी जिन्दगी के लिए कम समय नहीं होता। जरूरत इस बात की है कि हम इस समय के मोल को पहचानें, ताजगी और ऊर्जा भरे माहौल का उपयोग करें और कुछ ऎसा करें कि यह उत्तरायण हमारी जिन्दगी का अनमोल समय साबित हो।
उपलब्धियों और आनंद के साथ जीवन भर के लिए सुकून देने वाला हो। ऎसा हो पाए तभी यह उत्तरायण हमारे लिए मंगलदायी है। अन्यथा अब तक जाने कितने उत्तरायण आए और चले गए, हम न कुछ कर पाए, न हमसे हो पाया।
इस बार के उत्तरायण को व्यर्थ न जाने दें, दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ संकल्प लें और बढ़ चलें उस डगर पर जहाँ सुनहरी रोशनी का कोई दरिया अपनी तरफ उमड़ रहा हो। उत्तरायण का सूरज हम सभी को यही संदेश दे रहा है।

आईये उत्तरायण के सूरज की अगवानी करें, पूरे मन से स्वागत करें और सूरज की साक्षी में समय के साथ चलें, आगे बढ़ें और ऎसा कुछ करें कि दुनिया हमें याद रखे और वह भी पूरे आदर-सम्मान और श्रद्धा के साथ।

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