आलेख ( 24 जनवरी 2015 के लिए)
उनके न होने का सुकून
- डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
सुकून अपने आप में ऎसा शब्द है जिसका संबंध दिल से भी है, दिमाग से भी , शरीर से और परिवेश से भी। इन सभी का सामन्जस्य होने पर ही सुकून की परिपूर्णता की कल्पना की जा सकती है।
इनमें से एक का भी न होना सुकून में काफी हद तक कमी ला देता है और इसका दुष्परिणाम यह सामने आता है कि आधे-अधूरेपन का होना कई मामलों में वैषम्य और विषाद पैदा कर देता है और इसका सीधा असर पड़ता है व्यक्ति, घर-परिवार, समुदाय और क्षेत्र सभी पर।
आमतौर पर व्यक्तियों से ही सुकून का सीधा संबंध होता है क्योंकि जैसा इंसान होता है वैसा ही उसका परिवेश निर्मित होता है और इसी से सब कुछ सीधे-सीधे प्रभावित होता है। विचित्रताओं से भरे इंसान के स्वभाव के बारे में कोई स्पष्ट धारणा कभी नहीं बनाई जा सकती।
हर इंसान का स्वभाव अपने आप में अलग होता है और उसी के अनुरूप सब कुछ सृजित होता जाता है, ढलता जाता है। इसलिए यह कहा जाए कि सुकून का निर्माता इंसान है और सुकून से संबंधित सभी प्रकार की गतिविधियां उसी पर निर्भर हैं, तो अतिशयोक्ति नहीं होगा।
इंसान अच्छा होने पर माहौल अच्छा ही अच्छा हो जाता है जबकि इंसान खराब होने पर माहौल उसी की तरह बिगड़ने लगता है। कई लोगों के बारे में स्पष्ट धारणा होती है कि ये लोग जहाँ होते हैं वहाँ इनकी मौजूदगी मात्र से माहौल खुशनुमा हो उठता है और जो लोग इनके संपर्क में आते हैं, आस-पास रहते या काम करते हैं वे सभी प्रसन्न रहते हैं और प्रसन्न रहने के आदी हो जाते हैं।
इन लोगों के बारे में सहज स्वीकार्यता होती है कि ये लोग खुश रहते हैं और खुश रखने की कला भी जानते हैं। दूसरी ओर खूब सारे लोग ऎसे होते हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि ये जहां कहीं होते हैं वहां का सुख-चैन सब कुछ छीन जाता है, कलह व्याप्त हो जाता है और इनकी मौजूदगी जहां कहीं होती है वहाँ हर प्रकार की समस्याएं अपने आप घर करने लगती हैं।
आजकल विभिन्न बाड़ों में ऎसे लोगों की तादाद बढ़ती ही जा रही है जो लोग नकारात्मक माहौल का सृजन करने में सिद्ध हो गए हैं। इन लोगों में से काफी लोगों के बारे में साफ-साफ कहा भी जाता है कि इनका होना ही अपने आप में कलहकारी है और जहाँ ये होते हैं वहाँ का माहौल हमेशा प्रदूषित ही रहता है।
इन स्थितियों में यह देखा जाए कि विभिन्न स्थलों का माहौल खराब होने के पीछे ये लोग ही जिम्मेदार हैं जो गन्दी मानसिकता, विघ्नसंतोषी गतिविधियों और नकारात्मक कार्यों से ऎसा कुछ करते रहते हैं जो कि न बाड़ों के लिए अच्छा है न समाज या क्षेत्र के लिए।
दुर्भाग्य से ऎसे लोग हर स्थान पर हैं और अपनी चवन्नी चला रहे हैं। सज्जनों की उदासीनता का पूरा-पूरा लाभ लेने वाले ये लोग माहौल को खराब करने में कहीं पीछे नहीं हैं। इन लोगों के कुछ समय या कुछ दिन कहीं बाहर रहने की स्थिति में माहौल अपने आप ठीक हो जाता है तथा लोग साफ-साफ यह कहते हैं इनकी गैर मौजूदगी में जैसा सुकून होता है वैसा सुकून इनकी मौजूदगी में कभी नज़र नहीं आता।
इनके न होने का भी अपने आप में बड़ा सुकून है। अपने आस-पास भी देखें, ऎसे खूब सारे लोग देखने को मिल जाएंगे जिनके न होने की स्थिति में सुकून रहता है और अनुभव भी होता है। ईश्वर इन सभी लोगों को हमसे दूर ही रखे ताकि हम सुकून के माहौल में जी सकें।
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