Sunday, 18 January 2015

दिल से स्वीकारें हर परिवर्तन को

आज का आलेख ( 18 जनवरी 2015 के लिए )
दिल से स्वीकारें
हर परिवर्तन को
- डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com
परिवर्तन सृष्टि का अटल नियम है जो पिण्ड से लेकर ब्रह्माण्ड सभी के लिए लागू होता है और इनमें से कोई भी परिवर्तन से वंचित नहीं है।
हर परिवर्तन नई भूमिका और नवीन सृष्टि की भावभूमि रचता है और  इसका पूर्वापेक्षा बेहतर और परिष्कृत परिणाम ही सामने आता है। मनुष्य का असुरक्षा भय और भविष्य को लेकर उमड़ने-घुमड़ने वाली आशंकाओं का ही परिणाम है कि वह हमेशा यथास्थितिवादी बना रहना चाहता है ताकि अपनी आत्मतुष्टि का वर्तमान ग्राफ यों ही बना रहे।
और यही कारण है कि परिवर्तन से डरने और आशंकित रहने वाले लोग हमेशा वही स्थिति बनाए रखना चाहते हैं जिसमें वर्तमान में जी रहे होते हैं। इस वजह से इंसान जड़ता को ओढ़ लेता है और यही जड़ता उसे वहीं का वहीं बनाए रखती है।
यह वह स्थिति होती है जिसमें भावी आशंकाओं के भय से यथास्थिति भरे वर्तमान को हर कोई बनाए रखना चाहता है ताकि जहां जिस अवस्था में है उससे नीचे गिरे नहीं, कम से कम वहीं बना रहे।
इंसान अपने इसी स्वभाव की वजह से हर परिवर्तन से डरता है। परिवर्तन उसे वर्तमान से और अधिक अच्छा लगेगा तो वह सहर्ष स्वीकार कर लेगा लेकिन इसके लिए भी पहले सौ बार सोचेगा और सभी तरफ से  संतुष्ट होने के बाद ही इसे अपनाएगा।
लेकिन कोई सा परिवर्तन उसे बुरा लगता है अथवा अपने मन में बांधी गई सीमाओं और रेखाओं से अलग महसूस करता है तब वह इसे स्वीकार करने में हिचकता है।
आम तौर पर हर इंसान को यही भ्रम होता है कि दुनिया में सबसे अधिक समझदार प्राणी वही है और उसने जो सोच लिया, कह दिया वही होना चाहिए। मनमाफिक सब कुछ होता रहे तो इंसान प्रसन्न रहता है, थोड़ा सा दांये-बांये हो जाने पर विचलित हो उठता है। जबकि अधिकांश मर्तबा परिवर्तन अपने भले और विकास के लिए होते हैं और उससे माहौल तथा पूरा परिवेश तरक्की पाने लगता है लेकिन यथास्थितिवादी और जड़ लोग हर परिवर्तन को नकारने के लिए सामने हो जाते हैं।
अधिसंख्य लोग ऎसे ही हैं जो परिवर्तन को स्वीकार नहीं कर पाते हैं और परिवर्तन की आहट सुनते ही उनमें खलबली मचने लगती है। मनुष्य दिन रात गपियाते हुए, बेवजह शोर मचाते हुए देश और दुनिया सभी का चिन्तन करता है, सभी के बारे में खुलकर अभिव्यक्ति देता है, अपनी राय बनाता है और उपदेश झाड़ता है लेकिन सीट बदल दी जाए, स्थान बदल दिया जाए तो वह घबरा उठता है, हायतौबा मचा देता है जैसे कि परिवर्तन आने पर उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा और उसके बाद ऎसा कुछ नहीं बचेगा जो उसके लिए होगा।
वैश्विक चर्चाओं में खूब रस ले लेकर बकवास करने का आदी इंसान कुछ मीटर और किलोमीटर परिवर्तन सामने आ जाने पर आपा खो बैठता है, चिल्लपों मचाने लगता है और उन्मादी अवस्था में आकर वह सब कुछ करने लग जाता है जो आम इंसान बहुधा विक्षिप्तावस्था प्राप्त होने पर करने लगता है।
यह मान कर चलना चाहिए कि हर परिवर्तन पहले से और अधिक बेहतर स्वरूप में आता है और कर्मयोग का आनंद भी देता है, मस्ती भी। जो लोग परिवर्तन को हृदय से स्वीकार कर लिया करते हैं वे लोग परिवर्तन से आने वाले सभी प्रकार के सुकून को पाने के हकदार हो जाते हैं और पूरी मौज-मस्ती के साथ जीते हैं जबकि परिवर्तन से जी चुराने वाले और सायास अस्वीकार करने के आदी लोग जिन्दगी भर कुढ़ते ही रहते हैं और ऎसे लोगों के जीवन में बार-बार ऎसा परिवर्तन सामने आता रहता है कि  जो उनके लिए न सुख देने वाला होता है न शांति।
हर परिवर्तन अच्छे के लिए आता है और अच्छा ही अच्छा करता है। इसलिए प्रत्येक परिवर्तन को तहे दिल से स्वीकारें और परिवर्तन से उपजी बयारों के साथ बहते हुए पूरी मद-मस्ती के साथ जीने का माद्दा विकसित करने की आज सर्वाधिक जरूरत है।

दिल से स्वीकारा जाने वाला हर परिवर्तन आनंद देता है जबकि परिवर्तन से भय खाने वाले लोगों का हर दिन आशंकाओं और भ्रमों के कोहरे से ढंका हुआ तनावों और उद्विग्नताओं को जन्म देता है। इसलिए यह जरूरी है कि हर परिवर्तन को स्वीकारें और उसके अनुरूप अपनी अनुकूलताओं को समानान्तर चलाते हुए आगे बढ़ें।

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