Sunday, 11 January 2015

दुर्भाग्यशाली ही हैं कामटालू और बहानेबाज

आज का आलेख (11 जनवरी 2015 के लिए)
दुर्भाग्यशाली ही हैं
 कामटालू और बहानेबाज

- डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com
समय अपनी धुरी पर निरन्तर और नियमित रूप से बढ़ता ही चला जा रहा है। न यह कभी रुकता है, न रूकने वाला है।  समय को न कोई बांध सका है, न किसी में सामथ्र्य है।
समय कभी हमारे हिसाब से नहीं चलता, हमें ही इसके हिसाब से चलना पड़ता है। उसी का जीवन सफल है जो समय के साथ तालमेल बिठाकर चलना सीख जाता है और अपने आपको समय के अनुकूल ढाल देता है।
समय के बारे में दुनिया का कोई इंसान यह नहीं कह सकता कि उसे कुछ करने का समय नहीं मिला। धरती पर आने वाले प्रत्येक प्राणी के  पास पर्याप्त समय होता है जिसमें वह अपनी इच्छा के अनुरूप वह सब कुछ कर सकता है जो उसे अपेक्षित होता है।
दुनिया में जिन लोगों ने इतिहास कायम किया है वे समय के मूल्य को पहचानते थे इसलिए उन्होंने एक-एक क्षण का उपयोग किया और दुनिया भर में नाम कमाया। इनमें आज भी ऎसे अननिगत हैं जो अमर हैं। पूरी दुनिया इनका पावन स्मरण करते हुए गुणगान कर कृतज्ञता अर्पित करते हुए नहीं थकती।
हर युग में जमा होती रहने वाली जनसंख्या की भारी भीड़ में कुछ प्रतिशत लोग ऎसे समझदार और विवेकी लोग जरूर होते हैं जो समय के मूल्य को जानते-पहचानते हैं और उसी के अनुरूप समय का पूरा-पूरा उपयोग करते हुए अपने व्यक्तित्व को उच्चतम शिखरों पर प्रतिष्ठित कर आशातीत और अप्रत्याशित सफलता प्राप्त कर लिया करते हैं।
ये लोग कभी भी कल के भरोसे कोई काम नहीं करते हैं बल्कि इनके जीवन में कल या परसों का कोई वजूद नहीं रहता है। इस मायने में पूरी दुनिया के लोगों को सीधे तौर पर दो वर्गों में बाँटा जा सकता है। एक वे सौभाग्यशाली लोग हैं जो समय के महत्व को जानते हैं और उसका भरपूर उपयोग कर लेने का पूरा माद्दा रखते हैं तथा अपने जीवन को सफल बना लेते हैं।
दूसरी किस्म में वे लोग आते हैं जो हर काम को कल-परसों पर टालते चले जाते हैं और आज उपलब्ध भरपूर समय की उपेक्षा करते हैं। ऎसे लोगों को दुर्भाग्यशालियों की श्रेणी में गिना जा सकता है।
इनके बारे में कहा जा सकता है कि ये लोग टाईमपास इंसान ही हैं जो दुनिया के बगीचे में भ्रमण करने आए हैं और भिखारियों की तरह इधर-उधर घूमते हुए हाथों में बड़ी-बड़ी झोलियां लिए कुछ न कुछ कचरा बीनते हुए नीचे मुँह किए लगातार चल रहे हैं। इन्हें पता ही नहीं है कि समय कितना मूल्यवान है। 
धन-सम्पत्ति और ढेर सारे संसाधनों के साथ सब कुछ होते हुए भी वे लोग निर्धन हैं जिन्हें समय का मोल पता नहीं है। ऎसे लोग अपने आपको कितना ही लोकप्रिय, काबिल, समझदार और स्वयंभू समझते रहें, इनके जैसा दुर्भाग्यशाली और कोई नहीं हो सकता है। और भाग्यहीन भी ऎसा कि जिनके साथ रहता है, जिन बाड़ों में काम करता है वहाँ भी इनकी काली छाया इतनी पसरी हुई रहती है कि साथ रहने वाले लोगों का जीवन भी दुर्भाग्य से घिर कर रह जाता है।
यह दुर्भाग्य अकेले नहीं आता बल्कि अपने साथ आलस्य, प्रमाद, अहंकार, टालमटोल, बहानेबाजी, अकर्मण्यता, नालायकी, द्वेष, शत्रुता, खिन्नता, विषाद, बीमारियां और शोक आदि को साथ लेकर आता है।
यही कारण है कि जो लोग समय की उपेक्षा करने के आदी होते हैं वे लोक सनकी, अहंकारी, नालायक, निकम्मे होने के साथ ही किसी न किसी प्रकार की मानसिक या शारीरिक बीमारी से ग्रस्त रहते हैं।
इनके पूरे जीवन में कोई दिन ऎसा नहीं जाता जब इन्हें ढेर सारी बददुआएं न मिलें। इन्हीं बद्दुआओं का परिणाम यह होता है कि इनका पूरा जीवन समस्याओं, तनावों और शोक से घिर जाता है तथा इनके सम्पर्क में आने वाला हर इंसान यही महसूस करता है कि इन्हें मनुष्य बनाकर भगवान ने गलती ही की है। इन लोगों में मनुष्यता का कोई गुण नहीं मिलता बल्कि सारे के सारे अवगुण ही अच्छी तरह इनके मन-मस्तिष्क में घर किये हुए होते हैं।
खूब सारे लोग ऎसे देखे जा सकते हैं जिन्हें भरपूर तनख्वाह मिलती है, बावजूद उसके धेले भर का काम नहीं करते, टाईमपास करते हुए तारीखें, दिन, महीने और साल निकाल देना, कामों को अटकाना और किसी न किसी बहाने लटकाए रखना इनकी नियति ही हो गया है।
जो लोग बिना काम-काज किए तनख्वाह या पारिश्रमिक लेने के आदी हैं उन सभी लोगों के जीवन का उत्तराद्र्ध नारकीय ही रहता है। पुरुषार्थहीन पैसा जिसके पास भी होता है वह उसके किसी काम का नहीं होता चाहे वह कितने ही लाख-करोड़ या अरब-खरब कमा ले।
हमारे आस-पास से लेकर दुनिया भर में देखा जाए तो शायद ही कोई ऎसा पुरुषार्थहीन इंसान मिलेगा जिसके पास बिना पुरुषार्थ की अनाप-शनाप कमाई जमा हो तथा उसके किसी काम आयी हो। अन्यथा बिना परिश्रम की कमाई और ड्यूटी से जी चुराने वालों का पैसा या तो बीमारियों में ही जाता है अथवा किसी न किसी तरीके से चोरी हो जाता है या नष्ट हो जाता है।
जहाँ हम काम करते हैं वहाँ अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाएँ और अपने पास आने वाला हर काम उसी दिन पूरा कर डालने की आदत डालें अन्यथा ये बहाने, टालमटोल और नालायकियां अन्ततोगत्वा मानसिक और शारीरिक बीमारियों के साथ आकस्मिक शोक-संताप और अवसान की ओर ही ले जाने वाली हैं।
जब दुर्भाग्य का साया अपनी ओर आता है तब न कोई संगी साथी बचा सकता है, न साथ काम करने, खाथ उठने-बैठने और खाने-पीने वाले लोग ही। जो लोग कामों को टालते हैं, बहाने बनाते हैं उन सभी लोगों के ग्रह-नक्षत्र भी ऎसे लोगों को ठिकाने लगाने के लिए पीछे पड़े होते हैं।
जो काल को नहीं पहचानता, उसका अनादर करता है उसे खा जाने के लिए काल हमेशा उपयुक्त मौके की तलाश में बना रहता है।

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