आलेख (30 जनवरी 2015 के लिए)
सम्मानितों से
पाएं प्रेरणा
- डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com
हर इलाके में कई सारी बहुआयामी प्रतिभाएं होती हैं जो
समाज-जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ न कुछ अच्छे कार्यों में रमी रहती हैं और
दूसरों से अलग हटकर अपने व्यक्तित्व को निखारती हैं। इन प्रतिभाओं में खूब सारी
विशेषताएं होती हैं लेकिन हम उन्हें सामान्य समझ कर उपेक्षित कर दिया करते हैं
जबकि ऐसे व्यक्तित्वों से प्रेरणा पाकर हम अपने जीवन को सँवार सकते हैं और हम भी
ऐसे काम कर सकते हैं जिनसे हमारा नाम हो, हमारे परिजनों को खुशी हो, हमारे
अपने क्षेत्रा को गौरव प्राप्त हो तथा हमारे श्रेष्ठ कर्मों की गौरवशाली परंपराएँ
हमेशा विद्यमान रहें। हमारे आस-पास जो हुनरमंद लोग हैं, जिनमें
ज्ञान, कर्म या
और किसी भी प्रकार की कोई और विलक्षण प्रतिभाएं हैं उन्हें सच्चे मन से स्वीकारें।
हमारी स्थिति ऐसी हो गई है कि हम अपने आस-पास की प्रतिभाओं को पहचान नहीं पाते हैं
और उनके प्रति उदासीन रहते हैं या सायास-अनायास उपेक्षित कर दिया करते हैं। दरअसल
हम आदमी को पहचानने की क्षमता खो चुके हैं और यही कारण है कि उसकी क्षमताओं के
प्रति नगण्य भाव बनाए रखते हैं। हमें किसी आदमी की काबिलियत का पता तब चलता है कि
जब वह राजमान्य या राज्याश्रित होने लगता है। इसके बाद ही उसकी लोक मान्यता बढ़ने
लगती है। इससे पहले लोक मान्य नहीं होता, यह आज के समाज की दुरावस्था का नमूना
है। जबकि होना ठीक इसके उलट चाहिए। पहले लोक मान्य हो तब राजमान्य हो। साल भर में 26 जनवरी, 15 अगस्त और
दूसरे खूब सारे मौके ऐसे आते हैं जब किसी न किसी प्रतिभा को सम्मान और अभिनंदन से
नवाजा जाता है,
पुरस्कृत किया जाता है। पिछले कई वर्षों से यह क्रम बना हुआ
है और इसे देखते हुए कोई इलाका ऐसा नहीं बचा होगा जहाँ तादाद सैकड़ा या हजार पार न
कर गई होगी। इस स्थिति में यह तो तय माना ही जाना चाहिए कि सभी जगह काबिल और
हुनरमंद, लोकमान्य
और राजमान्य लोगों की कोई कमी नहीं है। इन प्रतिभाओं का लाभ पाकर हम कुछ न कुछ सीख
सकते हैं,
हुनर पा सकते हैं और इनके ज्ञान तथा अनुभवों का लाभ पाकर
आगे बढ़ सकते हैं, हजारों दूसरों को सीखा सकते हैं और इस प्रकार अपने इलाके, समाज और
देश सभी को इतनी तरक्की दे सकते हैं कि जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी।
लेकिन इतनी सारी प्रतिभाओं का समृद्ध
भण्डार अपने यहाँ मौजूद होने के बावजूद इनका कोई लाभ हम प्राप्त नहीं कर पाएं तो
यह हमारा ही दुर्भाग्य कहा जाएगा। हम सभी का फर्ज है कि अपने इलाके से अब तक
सम्मानित हो चुकी सभी प्रकार की हस्तियों का लाभ पाएं और उनसे प्रेरणा प्राप्त कर
जीवन को सँवारें तथा सामाजिक विकास के साथ देश का गौरव बढ़ाने के लिए प्रयास करें।
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